Confidence ( आत्म्विश्वास )
आत्म्विश्वास हमारे जीवन का एक ऐसा पहलू है जो हमसे पूरे समय जुड़ा रहता है , अगर बात की जाए बचपन से तो हमारा बचपन में पढ़ाई के अलावा और कोई भी काम नहीं होता था , फिर कुछ बच्चे ऐसे होते है जो पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते क्योंकि कुछ तो ऐसे होते हैं कि वो ये ही सोचते है पूरे समय की पढ़ाई कर के भी हमे करनी तो job ही है , इसलिए उनका विश्वाश वहीं पर खत्म हो जाता है , अगर मान लीजिए आप किसी बड़े पद की परीक्षाओं के लिए आवेदन करते हो , अगर आप में आत्मविश्वास नहीं होता तो आप उस चीज़ के बारे में सोचते भी नहीं , मान लीजिए आपने सोच लिया आप परिक्षा देने भी चले गए उसके बाद आदमी में दो प्रकार की सोच होती है , सकारात्मक और नकारात्मक -
सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति हमेशा उस परीक्षा को उस हिसाब से देगा जिससे वो कुछ कर सके और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ सके ,
नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति उस परीक्षा को एक कहानी समझ कर देखेगा ,
आत्म्विश्वास उन व्यक्तियों में होता है जो गलत बातों को अपनी और भटकने भी नहीं देते ,
आत्म्विश्वास से जुड़ी कहानी -
एक गरीब बुजुर्ग व्यक्ति भीख मांग कर अपना घर गुजारा करता था , एक दिन वह भीख मांगता हुआ एक बस्ती में चला गया , एक दुकान पर एक व्यक्ति खड़ा था उसके पास जाकर भीख मांगने लगा , तब उस व्यक्ति ने उस बिखरी से कहा दादा आप इतने बुजुर्ग होकर भीख मांग रहे हो , आपके बेटे नहीं है क्या
भिखारी बोला - उदास होकर बेटे तो हैं पर उनके माता-पिता नहीं है ,
ये सुनकर वो व्यक्ति चौकन्ना रह गया और सोचने लगा इन्होंने ये क्या बात कह दी ,
उसने उस गरीब से पूछा इसका क्या मतलब हुआ बेटे तो है परंतु उनके माता पिता नहीं हैं ,
उस गरीब ने दुखी होकर कहा मेरे 5 बेटे हैं परंतु मेरी वृद्धावस्था आते ही मुझे घर से निकाल दिया , बस तब से लेकर आज तक इसी विश्वाश में जी रहा हूं कोई तो आएगा जो मुझे इस अवस्था में सम्भालेगा ,
उसके बाद वो व्यक्ति उस बुजुर्ग को अपने घर ओर उसकी सेवा करने लगा ,
इस कहानी से यहीं सिख मिलती है अवस्था चाहे केसी भी हो मदद करने वाले मिल ही जायेंगे , इस लिए अपना विश्वास मत खोएं ।
◆ हरिओम पारीक

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