किस्मत
मनुष्य के साथ जब भी कोई घटना घटित होती है तो लोग सिर्फ उसकी किस्मत को ही दोष देते है , इसलिए मनुष्य के जीवन मे किस्मत का किरदार भी उतना ही माना गया है जितना उसके भाग्य में लिखा होता है,
कभी भी हमारे साथ गलत होने पर हम सीधा अपनी किस्मत को ही दोष देने लगते हैं, परंतु वो गलती हमसे जान बुझ कर होती है उसमें पूरा हमारा दोष होता है,
भगवान ने जो हमारी जीवनी में लिखा है वहीं हमारे साथ होता है, इसलिए जो कर्म करते है हम उसीका का फल मिलता है, इसलिए ना भगवान को दोष दे क्योंकि हमारी किस्मत में भी वहीं लिखा जाता है जो हमारे पिछले जन्मों के कर्म से मिलता है,

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