अच्छी सोच
ये नाम आपने अपनी जिंदगी में बचपन से लेकर बुजुर्ग होने तक सुना होगा , क्योंकि ये नाम ही ऐसा है जिसके द्वारा हम अपना एक समाज बनाते है और उसी में रहने के लिए अपना स्थान बनाते है , हमारे परिवार वाले हमारे जन्म लेते ही हमें सबसे पहले अच्छी अच्छी बातों का अभ्यास कर हमें सुद्ध बोलना सिखाते है ।
मान लीजिये बचपन में आपको एक अच्छी परवरिश नहीं मिले और आप गलत राह पर चल पड़ें तो वो बात आपकी सोच पर निर्भर नहीं करता , क्योंकि आपके मन ने आपको भटकाया है बल्कि आपकी सोच आपका साथ छोड़कर कहीं नहीं गयी है , चाहे आप कितने भी बुरे आदमी क्यों न हो , यदि आप किसी एक गरीब की सहायता कर देते हो तो , उसी समाज में पूजनीय बन जाओगे ।
बचपन से अपनी सोच को अपने वश में रखने के लिए हम अथक प्रयाश करते है फिर भी कुछ लोगों की सोच उनके वस में न होकर भटक जाती है , और किसी भी वस्तु का भेदभाव करने लग जाता है , मनुष्य अपनी सोच को भूल कर अपने परिवार के प्रति भी कुछ गलत सोचने लगे जाता है जिसके कारण उसके परिवार को वो सब दुख झेलना पड़ता है , जो इनकी जिन्दगीं में नहीं थे , फिर भी उसकी सन्तान की वजह से उन्हें झेलने पड़े ।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
Please do not enter any spam Link in the comment box.