खुशी
ये शब्द सुनने ही मन में उत्साह झलक उठता है , फिर इस शब्द का प्रयोग आप समझ ही सकते है हमारे जीवन में इसकी कितनी अहमियत्ता होगी , हमेशा मनुष्य को खुश रहना चाहिए क्योंकिं भगवान ने इस सृष्टि को बनाया उसमें इंसानो ने इतना प्यारा नाम जोड़ा ,
खुशी मुख्य रूप से 2 प्रकार की होती है ,
1. बाहरी खुशी
2. भीतरी खुशी
1. व्यक्ति के मन मे दुख होता है परंतु वो बाहर से उस दुख को प्रकट नहीं करता उसे बाहरी खुशी कहते है , यदि किसी व्यक्ति को कोई भी दिल पर लगने वाली बात बोल देता है , तो उसे भीतर से बुरा लगता है परंतु वो कभी व्यक्त नहीं करते , यदि मान लीजिए आप अपने प्रिय मित्र को ऐसी बात कह देते हो जो नहीं कहनी चाहिए थी , तो उस बात से आपके मित्र को बहोत ही ज्यादा बुरा लगता है , परन्तु वो कभी भी आपके सामने उस दुख को प्रकट नहीं करता , यदि आपको कोई खुशी मिलती है तो आपकी खुशी में वो भी सम्मिलीत हो जाता है और बाहरी खुशी व्यक्त करता है ।
2. कुछ लोग ऐसे भी होते है जिनको अपने हर काम की सफलता मिल जाती है परंतु वो कभी भी दूसरों के सामने अपनी खुशी का इजहार नहीं करता वो एक तरफ से भीतर की खुशी होती है , मान लीजिये कोई छात्र परीक्षा में अच्छे नम्बरों से उत्तीर्ण होता है परंतु अपनी उस सफलता का इजहार नहीं करता है ।
इसलिए इन दोनों में कोई खास अंतर नहीं है दोनों ही मनुष्य के जीवन को सफल बनाने के काम में आती है ।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
Please do not enter any spam Link in the comment box.