बुरी आदत बचपन से दो ही बातों पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया है अच्छी और बुरी , जब बचपन में था तब बता नहीं था कि अच्छी बातें क्या होती हैं और बुरी बातें क्या होती है , इसलिए जो भी कुछ होता वो अपनी खुशी समझ कर साथ लेकर चल दिया करता था , किसी ने सही कहा है अच्छी आदतें इंसान को जीना सीखा देती है , ओर बुरी आदत जीने का जरिया भी भुला देती है , जब बच्चा था तब मां से सुना था बस , बेटे कभी भी बुरी आदत मत अपनाना क्योंकि बुरे काम वहीं करता है , जिसके साथ अच्छाई नहीं होती , परन्तु वो ये नहीं समझते कि जो अच्छे कर्म करेगा उसी के साथ अच्छाई भी चलेगी । बुरी आदतों का कोई भी प्रारूप नहीं होता कि उसने कितना गलत काम किया है , उसकी कितनी बड़ी गलती है उसमें , बल्कि बुरी आदतों से तो सीधा घर ग्रहस्ती में क्लेश उतपन्न होता है , इसके सिवा और कुछ भी नहीं होता । बुरी आदतों में इस युग में सबसे ज्यादा नशे का नाम लिया जाता है , जिसके कारण अब अपना परिवार भी भूल जाते है , किसी ने सही कहा है जान है तो जहान है , इसमे ...
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